दिशा रवि को बेल देते हुए जज ने कहा- असहमति राजद्रोह नहीं है

 

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को टूल किट मामले में गिरफ़्तार की गईं 22 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को ज़मानत दे दी है. बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहंती के अनुसार, दिशा रवि को दिल्ली की तिहाड़ जेल से मंगलवार देर रात रिहा कर दिया गया है.

पुलिस ने दिशा रवि को दिल्ली की एक अदालत में पेश करते हुए कहा था कि "दिशा रवि टूल किट गूगल डॉक्युमेंट की एडिटर हैं और इस डॉक्युमेंट को बनाने और इसे प्रसारित करने में उनकी मुख्य भूमिका है."

दिशा रवि पर लगे आरोपों पर एडिशनल सेशन जज धर्मेंद्र राणा ने कहा, "मुझे नही लगता कि एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाना या किसी हानि न पहुँचाने वाले 'टूलकिट' का एडिटर होना कोई जुर्म है."। 


उन्होंने कहा, "इस कथित टूलकिट या पीजेएफ (पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन) से लिंक को आपत्तिजनक नहीं माना गया है, इसलिए सिर्फ़ व्हाट्सएप ग्रुप पर उन चैट को हटाने, जिनका टूलकिट और पीजेएफ से संबंध है, उसका कोई मललब नहीं रह जाता."। 


कोर्ट ने क्या कहा?

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ कोर्ट ने कहा कि संचार को लेकर कोई भौगोलिक बाधा नहीं है और एक नागरिक ने पास मौलिक अधिकार है कि वो उपलब्ध साधन का इस्तेमाल कम्युनिकेशन भेजने का प्राप्त करने के लिए कर सकता है.

जज ने कहा कि ये स्वाभाविक है कि रवि किसी तरह के विवाद से दूर रहना चाहती थीं. इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि रवि का पीजेएफ़ के खालिस्तानी समर्थक कार्यकर्ताओं से संबंध के भी कोई सबूत नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं 26 जनवरी को हुई हिंसा का संबंध रवि या पीजेएफ से है.। 


जज धर्मेंद्र राणा ने रवि को एक लाख के पर्सनल बॉन्ड पर ज़मानत दी. उन्होंने कहा, "रिकॉर्ड में कम और अधूरे सबूतों को ध्यान में रखते हुए मुझे 22 वर्षीय लड़की, जिसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, वो ज़मानत के नियम तोड़गी, इसका भी ठोस कारण नहीं मिल रहा है."। 


उन्होंने कहा, "मेरे ख्याल से नागरिक एक लोकतांत्रिक देश में सरकार पर नज़र रखते हैं. सिर्फ़ इसलिए कि वो राज्य की नीतियों से असहमत हैं, उन्हें जेल में नहीं रखा जा सकता. राजद्रोह का आरोप इसलिए नहीं लगाया जा सकता कि सरकार को उससे चोट पहुँची है."

कोर्ट ने कहा कि मतभेद, असहमति, अलग विचार, असंतोष यहां तक कि अस्वीकृति राज्य की नीतियों में निष्पक्षता लाने के लिए ज़रूरी उपकरण हैं. अदालत ने कहा, "एक जागरूक और मुखर नागरिकता एक उदासीन या विनम्र नागरिकता की तुलना में निर्विवाद रूप से एक स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र का संकेत है."। 

"संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत असंतोष का अधिकार दृढ़ता से निहित है."। 


दिशा को जांच में सहयोग करने का निर्देश

इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले कि रवि ने टूल किट पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को भेजा और इससे दुनिया के दूसरे लोगों तक अलगाववादी विचार फैला.। 

कोर्ट ने ये भी कहा कि वो इस बात को समझते हैं कि इस तरह से किसी अपराध के लिए सबूत इकट्ठा करना मुश्किल है.


"मुझे इस तथ्य के बारे में भी पता है कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और पुलिस और सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया में है. जांच एजेंसियों ने मौजूद सबूतों के आधार पर (रवि को) गिरफ्तार किया लेकिन अब उन्हें महज शक के आधार पर किसी नागरिक की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है."। 


अदालत ने रवि को निर्देश दिया कि वो जांच में सहयोग करना जारी रखें और अदालत की अनुमति के बिना वो देश से बाहर न जाएं.। 


अदालत ने कहा कि हिंसा में शामिल 100 से ज़्यादा लोगों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर किया है, और उनसे पूछताछ की जा रही है, लेकिन रवि का संबंध हिंसा के किसी अपराधी के साथ है, अभियोजन पक्ष पर इसे रिकॉर्ड पर नहीं ला पाया है.। 


कौन हैं दिशा रवि


बेंगलुरु की 22 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ़्तारी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले युवाओं के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है.

दिशा रवि 'फ़्राइडे फ़ॉर फ़्यूचर' नामक मुहिम की संस्थापक हैं. उन्हें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 13 फ़रवरी को बेंगलुरु से गिरफ़्तार किया था.


कोट में रवि को पेश करते हुए पुलिस ने अपने बयान में कहा था कि "दिशा रवि टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट की एडिटर हैं और इस डॉक्यूमेंट को बनाने और इसे प्रसारित करने में उनकी मुख्य भूमिका है."


"इस सिलसिले में उन्होंने खालिस्तान समर्थक 'पोएटिक जस्टिस फ़ांउडेशन' के साथ मिलकर भारतीय राज्य के प्रति वैमनस्य फैलाने का काम किया और उन्होंने ही ग्रेटा थनबर्ग के साथ यह टूलकिट शेयर किया था."

दिशा पर भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत राजद्रोह, समाज में समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने और आपराधिक षड्यंत्र के मामले दर्ज किए गए.

दिशा ने 'फ़्राइडे फ़ॉर फ़्यूचर' की शुरुआत तब की थी, जब 2018 में ग्रेटा थनबर्ग ने अपने पर्यावरण बचाओ अभियान से दुनिया भर में हलचल मचा दी थी.

वे विरोध-प्रदर्शनों से ज़्यादा झीलों को साफ़ करने और पेड़ों को कटने से रोकने को लेकर सक्रिय रहती हैं.




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