राज्यसभा में PM Modi की वो 5 बातें जो बनी आकर्षण का मुख्य केंद्र, आप भी देखें

 PM MODI IN RAJYSABHA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राज्यसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कोरोना, अर्थव्यवस्था और कृषि कानूनों को लेकर अपनी बात रखी। इसके अलावा इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा। सदन इस मौके पर कई बार ठहाको की भी अवाज से गूंज उठा। तो चलिए जानते पीएम मोदी के संबोधन की वो 5 बातें आज के दिन की मुख्य आकर्षण रही. . 
विपक्षी नेतानओं ने लिया यू-टर्न
पीएम मोदी ने कृषि सुधारों की बात करते हुए विपक्षियो पर जमकर निशाना साधा। छेटे किसानों की समस्याओं से हर कोई परिचित है। समय-समय पर उनके सशक्ती करीण की मांग भी उठी है। शरद पवार और कांग्रेस के हर नेता ने कृषि सुधारों की वकालत की है क्योंकि हर किसी को लगता है कि ये अनिवार्य है। सभी ने कृषि सुधारों की बात की है। अब जब हमारी सरकार ये सुधार लेकर आई है तो वो इसका विरोध कर रहे है। मैं हैरान हूं कि अचानक से इन सभी ने यू-टर्न ले लिया है.. 
पूर्व पीएम का दोहराया कोट
प्रधानमंत्री ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के एक कोट को दोहराते हुए कहा, 1930 में मनमोहन सिंंह ने किसान को उपज बेचने की आजादी दिलाने और भारत को एक कृषि बाजार दिलाने के संबंध में अपना इरादा व्यक्त किया था। अब यही चीज हम कर रहे है। आप लोगों को तो गर्व होना चाहिए और कहना चाहिए कि मनमोहन सिंह ने कहा था और अब मोदी वो कर रहा है. . 
मजाकिया अंदाज में विपक्ष पर कसा तंज
मजाकिया अंदाज में विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, जो लोग उछल-उछल कर राजनीतिक बयानबाज़ी करते हैं, उनके राज्य में जब उनको मौका उन्होंने इसमें से आधा-अधूरा कुछ न कुछ किया है। चर्चा में लॉ की जो स्पिरिट है उस पर बात नही हुई, बल्कि शिकायत की है तरीका ठीक नहीं है, जल्दी कर दिया, इसको नहीं पूछा..ये तो रहता है परिवार में जब शादी होती है तब भी फूफी नाराज होकर कहती है, मुझे नहीं बुलाया है। इतना बड़ा परिवार है तो ये सब होता है है.. 
आंदोलन को खत्म करने की अपील
कृषि सुधारों पर आगे बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, कृषि क्षेत्र की समस्याओं का सामाधान करते हुए, किसान आंदोलन को खत्म करते हुए अच्छे काम होने दीजिए। बुरा हो तो मेरे खाते में डाल दीजिए, अच्छा तो अपनेे खाते में डाल लीजिए। हमे आंदोलनकारियों को समझाते हुए आगे बढ़ना चाहिए और मैं सदन के माध्यम से अपील करता हूं कि चर्चा करें और आंदोलन को खत्म कीजिए.. 

MSP था, MSP है और MSP रहेगा

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने किसानों को विश्वास दिलाया कि MSP हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि, एक बार कृषि सुधारों को मौका दीजिए और एक बार देखना चाहिए कि इस परिवर्तन से कुछ बदलाव होता है या नहीं। कोई कमी होगी तो उसे ठीक करेंगे, ढिलाई है तो उसे कसेंगे। मैं विश्वास दिलाता हूं कि, मंडिया अधिक आधुनिक और प्रतिस्पर्धा बनेंगी। इतना ही नहीं MSP था, MSP है और MSP रहेगा. . 

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