बाबा रामदेव ने इंडिया टीवी के रजत शर्मा की मिलीभगत से देशभर में जूठा प्रचार कर कोरोनिल बेची, WHO ने कहा हमने नहीं दी मंजूरी

 


इंडिया टीवी के संस्थापक रजत शर्मा ने ट्वीट कर देशवासियों को भरोसा दिलाया था लिखा, रामदेव की कोरोनिल को WHO से मिली मंजूरी”


चीन के वुहान शहर से निकलकर कोरोना वायरस ने देखते ही देखते पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया और साल 2020 लॉकडाउन सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों के साथ गुजरा। लेकिन साल के खत्म होते होते कोरोना वायरस की द’वाई की बातें सामने आने लगी। दुनियाभर के देश कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए टीके की खोज में थे।

और इसी प्रयास में योग गुरु बाबा रामदेव भी पीछे नहीं रहे उन्होंने भी कोरोनावायरस की एक द’वा’ई खोज निकाली जिसे उन्होंने ‘कोरोनिल’ नाम दिया गया था। जब यह द’वाई लांच की गई थी उस वक्त भी इस पर खासा वि’वा’द हुआ था लेकिन अभी वि’वा’द थमा नहीं है और डब्ल्यूएचओ की इस पर प्रतिक्रिया आई है. 

कोरोनिल जिस पर जमकर हुआ वि’वा’द

बता दें पिछले साल जून महीने में पतंजलि ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कोरोना किट लांच की थी जिस पर जमकर वि’वा’द खड़ा हो गया था। बाबा रामदेव ने कोरोना किट को लॉन्च करते हुए कहा था कि इसके उपयोग से कोरोना वायरस के मरीज ठीक हो जाएंगे।

बता दें जब कोरोना वायरस की दवा कोरोनिल लांच की गई उस वक्त स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे लेकिन इसके लॉन्च होते ही वि’वा’द खड़ा हो गया. 

दरअसल कोरोना की द’वा के रूप में कोरोनिल को लॉन्च करते हुए बाबा रामदेव ने कहा था कि उनकी यह दवा WHO को यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन से सर्टिफाइड है। उन्होंने यह दावा किया था कि WHO ने इस दवा को GMP यानी गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स का सर्टिफिकेट भी दिया है। लेकिन बाद में पता चला कि बाबा रामदेव की यह दा’वे हवा में थे जिनकी हकीकत कुछ और ही थी. 

आयुष मंत्रालय ने जारी कर दिया था नोटिस

योगगुरु बाबा रामदेव ने कोरोनावायरस की दवा लॉन्च तो कर दी थी लेकिन इसके लॉन्च होते ही बड़ा वि’वा’द खड़ा हो गया। दरअसल रामदेव मंच पर बैठकर जो दावे कर रहे थे उन्हें शाम होते-होते आयुष मंत्रालय ने झूठा करार दिया । शाम होते-होते उत्तराखंड के आयुष विभाग ने पतंजलि आयुर्वेद को एक नोटिस जारी कर दिया कि उन्होंने पतंजलि के लिए कोरोना की द’वा बनाने या जारी करने का कोई लाइसेंस अभी तक नहीं दिया है. 

हालांकि आयुष विभाग ने बाबा रामदेव को यह कहा था कि वे अपनी इस दवा को सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा के रूप में बेच सकते हैं। और जब वि’वा’द खड़ा हुआ और मंत्रालय का नोटिस आ गया तो बाबा रामदेव के बोल भी बदलने लगे। देखते ही देखते हुए बाबा अपनी दवा को बीमारी का असर कम करने वाली दवा कहने लगे. 

उन्होंने एक एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि आयुष विभाग ने उन्हें कोविड इलाज की जगह है कोविड प्रबंधन शब्द इस्तेमाल करने के लिए कहा था। अपनी द’वा को लांच करते वक्त बाबा रामदेव ने कहा था कि WHO से उन्हें सर्टिफिकेट मिला हुआ है लेकिन अब डब्ल्यूएचओ ने यह साफ कर दिया है कि उन्होंने किसी द’वा के लिए कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया. 

बता दें हाल ही में डब्ल्यूएचओ का एक बयान सामने आया है जिसमें डब्ल्यूएचओ का कहना है कि उसने कोविड-19 के ट्रीटमेंट के लिए किसी भी ट्रेडीशनल मेडिसिन के असर का ना कोई रिव्यू किया है और ना ही किसी को सर्टिफिकेट दिया है।

ऐसे में अब बाबा रामदेव के कोरोना वायरस की दवा को लेकर किए गए दा’वे की पोल खुल गई है जिससे यह सामने आता है कि बाबा रामदेव फर्जी सर्टिफिकेट का झांसा देकर कोरोना वायरस कि दवा के रूप में अपनी कोरोनिल बेच रहे थे।

Post a Comment

0 Comments