पेगासस जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कई वरिष्ठ पत्रकार, बोले- SC जज करें जांच


पेगासस मामला केंद्र सरकार के गले की फांस बनता जा रहा है। इसकी जांच की मांग को लेकर देश भर के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए इसके गहन जांच की मांग कर दी है। पेगासस जासूसी मांग को लेकर यह सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका होगी।

इस याचिका में कहा गया है कि देश के विशिष्ट नागरिकों की जासूसी के लिए किस प्रकार से सैन्य सेवाओं में काम आने वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।

यह पूर्ण रुप से भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए निजता के अधिकार का उल्लंघ् ान है। इस मामले की जांच किसी निवर्तमान या रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट के जज द्वारा कराई जाए।

देश के जाने माने अखबार द हिंदू के पूर्व एडिटर इन चीफ एन राम और एशियानेट के संस्थापक शशि कुमार द्वारा यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि पेगासस फोन हैकिंग मामला संचार, बौद्धिकता और निजता पर सीधा और अस्वीकार्य हमला है। ये संविधान द्वारा प्रदत्त निजता के अधिकार को ध्वस्त करता है।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 21 की याद दिलाई है और कहा है कि किसी भी नागरिक की निजता का अधिकार उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर लागू होता है।

उसका किसी भी प्रकार से हैकिंग या टैपिंग करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 की अवहेलना करता है। जिस पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल देश भर के चुनिंदा विशिष्ट नागरिकों के खिलाफ किया गया, वह निजता के अधिकार पर गहरी चोट पहुंचाने वाला है।

वहीं याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि जिस प्रकार देश भर के नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों, वकीलों के खिलाफ पेगासस का इस्तेमाल कर उनकी जासूसी की गई, वह किसी भी नागरिक की आजादी के अधिकारों के इस्तेमाल के साथ समझौता भी है। ऐसे में इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की सख्त जरुरत है।

वहीं पिछले दिनों पेगासस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने पेगासस सॉफ्टवेयर की जासूसी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा था कि यह सीधे सीधे राजद्रोह का मामला है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और इस जासूसी कांड में पीएम मोदी की क्या भूमिका है, इसकी जांच भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।

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